VijayGarh Fort - Robertsganj Sonbhadra U.P ( विजयगढ़ दुर्ग )


विजयगढ़ दुर्ग सम्प्रति सोनभद्र जनपद के राबर्ट्सगंज में स्थित है. यह मिर्ज़ापुर से 60 किमी दक्षिण-पूर्व 12 मील और चुनार से ५० मील दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित है विजयगढ़ दुर्ग जिस पहाड़ी पर स्थित है यह पहाड़ी समुन्द्र तल से 2.017 फीट ऊँची है और मैदान से लगभग 800 फीट की ऊँचाई पर स्थित है. 



यहाँ जिन दो मार्गो से पहुंचा जा सकता है उनमे से एक मार्ग गहर नदी के पुल से होकर जाता हैं. इस पुल पर एक अभिलेख लगा है. जिसके अनुसार यह पुल संवत 1929 में राजा बलवंत सिंह द्वारा बनवाया गया था.


माता भंडारी देवी – अहरौरा [Mata Bhandari Devi temple- Ahraura]


 
मिर्ज़ापुर अहरौरा में स्थित श्रधा व आस्था का केंद्र माता भंडारी देवी का यह मंदिर जहा नवरात्र में भक्तो का जनसैलाब उमड़ता है कुलदेवी के रूप में विख्यात माँ भंडारी देवी का यह धाम जहा स्थानीय लोग ही नहीं दूर दूर से माता के दर्शन के लिए आते है

शाह कासिम सुलेमानी की दरगाह शरीफ- चुनार [Dargah Sharif Chunar]

पूर्वांचल भर में शायद ही किसी जगह पर एसी दरगाह होगी जहाँ अनेकों सूफी संतो की दरगाह हो. और वहा पर की गयी पत्थरो पर नक्काशी और वास्तु कला के लिए प प्रसिद्ध हो. इतिहास गवाह है कि मुहम्मद साहब के सेनापति शहाबुद्दीन ने पूर्ण रूप से यहाँ मुसलमान राज्य स्थापित किया था. एसे में इस वंश के शासक की विधवा स्त्री से विवाह कर शेरशाह ने 1530 ई. में यहाँ अपना अधिकार जमाया. 1516 ई. में हुमायूँ ने रूमी की सहायता से छः महीने तक इस स्थान को घेर कर कब्ज़ा किया था.





शेरशाह के हाथों में फिर कुछ समय बाद चुनारगढ़ आ गया. 1575 में मुगलों ने पुन: चुनारगढ़ पर कब्ज़ा कर अपना शासन कर लिया. अकबर के समय में मिर्ज़ापुर जनपद इलाहाबाद के अंतर्गत आता था. जहाँगीर के शासन के समय शाह कासिम सुलेमानी अफगान मोलवी साहब को बादशाह के आदेश से उन्हें कैद कर चुनार किले में रखा गया. उनके बारे में माना जाता है कि वह राजकुमार खुसरों के समर्थक थे.

चुनारगढ़ दुर्ग तिलिस्म और रहस्य [Talismanic & Mystery of Chunar Fort]



 

प्रिय मित्रों ! चुनारगढ़ किला भारत कि ऐतिहासिक विरासत है यह एक अनमोल धरोहर है।चुनारगढ़ किले का इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान है यह किला लगभग 5000वर्षों के इतिहास का गवाह है ।जिस पहाड़ी इस किला स्थित है उस पहाड़ी कि प्राकृतिक संरचना मानव चरण के आकार कि है इसलिये इसका एक नाम चरणाद्रिगढ़ भी है इस किले का इतिहास महाभारत काल से भी प्राचीन है।