माता भंडारी देवी – अहरौरा [Mata Bhandari Devi temple- Ahraura]


 
मिर्ज़ापुर अहरौरा में स्थित श्रधा व आस्था का केंद्र माता भंडारी देवी का यह मंदिर जहा नवरात्र में भक्तो का जनसैलाब उमड़ता है कुलदेवी के रूप में विख्यात माँ भंडारी देवी का यह धाम जहा स्थानीय लोग ही नहीं दूर दूर से माता के दर्शन के लिए आते है

शाह कासिम सुलेमानी की दरगाह शरीफ- चुनार [Dargah Sharif Chunar]

पूर्वांचल भर में शायद ही किसी जगह पर एसी दरगाह होगी जहाँ अनेकों सूफी संतो की दरगाह हो. और वहा पर की गयी पत्थरो पर नक्काशी और वास्तु कला के लिए प प्रसिद्ध हो. इतिहास गवाह है कि मुहम्मद साहब के सेनापति शहाबुद्दीन ने पूर्ण रूप से यहाँ मुसलमान राज्य स्थापित किया था. एसे में इस वंश के शासक की विधवा स्त्री से विवाह कर शेरशाह ने 1530 ई. में यहाँ अपना अधिकार जमाया. 1516 ई. में हुमायूँ ने रूमी की सहायता से छः महीने तक इस स्थान को घेर कर कब्ज़ा किया था.





शेरशाह के हाथों में फिर कुछ समय बाद चुनारगढ़ आ गया. 1575 में मुगलों ने पुन: चुनारगढ़ पर कब्ज़ा कर अपना शासन कर लिया. अकबर के समय में मिर्ज़ापुर जनपद इलाहाबाद के अंतर्गत आता था. जहाँगीर के शासन के समय शाह कासिम सुलेमानी अफगान मोलवी साहब को बादशाह के आदेश से उन्हें कैद कर चुनार किले में रखा गया. उनके बारे में माना जाता है कि वह राजकुमार खुसरों के समर्थक थे.

चुनारगढ़ दुर्ग तिलिस्म और रहस्य [Talismanic & Mystery of Chunar Fort]



 

प्रिय मित्रों ! चुनारगढ़ किला भारत कि ऐतिहासिक विरासत है यह एक अनमोल धरोहर है।चुनारगढ़ किले का इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान है यह किला लगभग 5000वर्षों के इतिहास का गवाह है ।जिस पहाड़ी इस किला स्थित है उस पहाड़ी कि प्राकृतिक संरचना मानव चरण के आकार कि है इसलिये इसका एक नाम चरणाद्रिगढ़ भी है इस किले का इतिहास महाभारत काल से भी प्राचीन है। 

सिद्धनाथ की दरी जलप्रपात - Siddhnath Ki Dari Water Fall at Chunar Mirzapur



बाबा सिदाथनाथ की दरी चुनार और चुनार के आस पास के छेत्र का बहुत प्रसिद्ध स्थल है । यहाँ प्राकृतिक रूप से जल 100 फ़ीट की ऊँचाई से धरातल पे गिरता है जिससे इससे देखना हम सभी का मन मोहक़ दृस्य हैं और तो और झरने के चारो ओर प्रकृतिक रूप से फैला पहाड़िया एंड पेड़ पौधे यहाँ की खूबसूरती को और भी बढ़ा देते है।



इस प्राकृतिक जलप्रपात का नाम सिद्धनाथ बाबा के नाम पर पड़ा जो यहाँ साधना किया करते थे। यह स्थल स्थानीय लोगों एवं पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है। इसके अलावा लोग पुराने शैल चित्रों एवं नक्काशियों का अध्ययन करने के लिए भी यहाँ आते हैं। यह प्राचीन शिला स्थल एवं झरना पुरातत्व काल से अस्तित्व में है। इस जलप्रपात के पास बाबा सिद्धनाथ की दरी, समाधि स्थित है।



सिद्धनाथ की दरी चुनार से 18 किमी दूर है वाया रोड मार्ग आपको यहाँ आते समय सड़क के चारो ओर मनमोहक प्राकृतिक वतावराण दिखयेगा जो की आपको एक अलग ही आनंद का असहास करियेगा। रस्ते में आपको दो और टूरिस्ट प्लेस है जो की माता दुर्गा जी मंदिर और स्वामी अद्गदानादण्ड जी आश्रम मिलेगा जो की चुनार छेत्र का प्रशिद्ध प्लेस है।

सिद्धनाथ की दरी के लिए कैसे पहुंचें

 
बाबा सिद्धनाथ की दरी पहुचना अब बहुत आसान है आप चुनार स्टेशन से राजगढ़ जाने वाले रस्ते के लिए पहुचे ।अगर आपके पास आप की अपनी गाड़ी है तो आप इसी रास्ते से लगबग 20 किमी आगे आप बाबा सिद्धनाथ की दरी पाउच जायेंगे। या तो आप चुनार स्टेशन से डेली चलने वाली बस या टेम्पो से बी आ सकते है।
 

सिद्धनाथ की दरी भ्रमण के लिए उत्तम समय 

 
सिद्धनाथ की दरी घुमाने का सबसे बढ़िया मौसम सावन है । या तो आप जब बी बारिश हो यहाँ प्लान कर सकरे है। आप जब बी प्लानकरे ध्यान रखे मौसम सुहाना हो या फिर बारिश हुई हो।